घर के भेदी ने ही लंका ढहायी..एसआई भर्ती पेपरलीक के लिए आरपीएससी के सदस्य जिम्मेदार- राजस्थान हाईकोर्ट

जयपुर, 28 अगस्त।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 को रद्द कर दिया हैं. जस्टिस समीर जैन की अदालत ने अपने 202 पेज के आदेश में कहा कि इस भर्ती के पेपर लीक होने में आरपीएससी के चेयरमैन सहित 6 सदस्यों की सक्रिय भूमिका भी रही हैं.

अदालत ने कहा कि इससे साबित होता है कि घर के भेदियों ने ही लंका को ढहा दिया…भर्ती की गोपनीयता तब ही भंग हो गई थी, जब आरपीएससी के पूर्व सदस्य ने हाथ लिखित पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था….आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय श्रोत्रिय के भी मामले में शामिल होने से इसकी गंभीरता बढ़ती है..

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा श्रोत्रिय ने ना केवल रामूराम राईका को उनके बेटे और बेटी के साक्षात्कारों से संबंधित भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्देश दिए, बल्कि खुद ने भी साक्षात्कार पैनल में सक्रिय तौर पर भाग लिया था.

हाईकोर्ट ने आरपीएससी के 6 सदस्यों की गंभीर लिप्तता मानते हुए आदेश में कहा कि रामूराम राईका ने बाबूलाल कटारा, संगीता आर्य , मंजू शर्मा और जसवंत राठी से अपने दोनों बच्चों के इंटरव्यू को लेकर बात की है जो सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार को दर्शाता हैं.

राईका ने अपने बच्चों को पास करने के लिए संजय श्रोत्रिय से मिला और शोभा राईका की फ़ोटो कटारा को दिखाकर ड्रेस भी बताई और शोभा राईका के इंटरव्यू पैनल में बाबूलाल काटारा ही था.

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती की शुचिता नहीं रही है और इसको इसी स्टेज पर रद्द कर दिया जाना चाहिए….

एसओंजी ने बेहतर कार्य किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने भर्ती को रदृद करते हुए कहा कि एसओजी द्वारा बहुत ही गहनता और निष्पक्षता के साथ इस भर्ती की जांच की गई है और यह जांच उसी दिशा में है, जो वर्तमान राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किया था.

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार, एडवोकेट जनरल,कैबिनेट सब कमेटी और एसओजी ने भी एसआई भर्ती- 2021 को पूर्व में रद्द करने की सिफारिश की थी…राज्य सरकार और एडवोकेट जनरल ने बाद में भी यह माना था कि इस भर्ती को भविष्य में रद्द किया जा सकता है….भर्ती रद्द नहीं हुई तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर सकती है.

रिपोर्ट तैयार करें सरकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 सहित अभी तक की सभी भर्तियों की रिपोर्ट तैयार करे और RPSC को भर्तियों को रद्द करने की सिफारिश करें.वहीं RPSC भर्ती रद्द करने का विज्ञापन भी जारी करे.

नई भर्ती में शामिल करें पद

हाईकोर्ट ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को उसी विज्ञापन 3 फरवरी 2021 के तहत, या 17 जुलाई 2025 के विज्ञापन में वैकल्पिक व्यवस्था करे और इन पदों को नई भर्ती में शामिल करें.

इसके अलावा 2021 की भर्ती में शामिल हुए अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी आयु पात्रता में छूट पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाना चाहिए..आवेदकों को आगामी परीक्षा की तैयारी और परीक्षा में बैठने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए.

जनहित याचिका दायर

राजस्थान हाईकोर्ट ने आरपीएससी की कार्यप्रणाली को लेकर स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से जनहित याचिका दायर करते की हैं.

हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने का निर्देश देते हुए मामले को खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के लिए मुख्य न्यायाधीश को भिजवा दिया है..

मेजर सिंह और हरेन्द्र नील की पैरवी

गौरतलब है कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर आर पी सिंह ने पैरवी की हैं. मेजर आर पी सिंह अमेरिका में रहने के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते रहें.

यहां तक एक पैरवी में शामिल होने के लिए जिस सेंटर पर वे जा रहे थे उसी दौरान एक सडक हादसे में घायल हो गए थे. जिसके चलते अदालत को एक दिन की सुनवाई टालनी पडी.

दुर्घटना में परिजनों के घायल होने के बावजूद दूसरे दिन वीसी के जरिए याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा.

इस मामले में याचिकाकर्ताओं कि ओर से पैरवी करने वालों में हरेन्द्र नील और ओ पी सोलंकी भी प्रमुख रहे.

अधिवक्ता हरेंद्र नील ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और राजीव गांधी राष्ट्रीय लॉ यूनिवर्सिटी, पटियाला के पूर्व छात्र हैं. SI भर्ती 2021 के मामले में सर्वप्रथम राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता हैं.

गांव के गौरव