राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 12 से 30 साल पुरानी घटना के मामले में सालों बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई असंवैधानिक, अपीलीय कोर्ट के आदेश रद्द
पंचायती राज कर्मचारी को मौत के पंचायती राज कर्मचारी के निधन के बाद परिजनों को मिला सालों बाद न्याय, 20 साल बाद याचिका पर आया फैसला
जयपुर, 14 अगस्त 2025।
न्याय में देर भले हो, लेकिन अंधेर नहीं – यह कहावत राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर बिल्कुल सटीक बैठती है। लगभग 20 साल पहले दिवंगत हुए एक पंचायती राज विभाग के कर्मचारी के परिजनों को आखिरकार न्याय मिल गया है.
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पीठ ने एक लंबे समय से लंबित पड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि मृत कर्मचारी के परिवारजनों को सेवा से संबंधित सभी लाभ — पेंशन, बकाया वेतन, और अन्य वित्तीय देयताएं — तीन माह के भीतर प्रदान की जाएं.
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पीठ के जस्टिस आनंद शर्मा कि एकलपीठ ने अपराधिक मामलों से जुड़े इस मामले में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया हैं.
कर्मचारी मुरारीलाल गुप्ता ने जीवन काल में वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभाग के उस फैसले का विरोध किया था जिसके जरिए उनके खिलाफ 12 से 30 साल पुरानी घटनाओं के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई कि गयी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पाया कि 1997 में जारी चार्जशीट में जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया था, वे 1967, 1974, 1977 और 1984–85 की थीं.
सालों बाद कार्रवाई असंवैधानिक
हाईकोर्ट ने कहा कि 12 से 30 वर्षों के विलंब के बाद बिना किसी उचित कारण के अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करना असंवैधानिक हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी घटना के 12 से लेकर 30 साल बाद उसका उल्लेख करते हुए कार्रवाई शुरू करना ना केवल मनमाना, असंवैधानिक और अवैध निर्णय हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सिंद्धांतो का भी उल्लघंन हैं
हाईकोर्ट ने इस मामले में दिवंगत याचिकाकर्ता मुरारीलाल के खिलाफ अपीलीय कोर्ट द्वारा 20 मार्च 1999 और 28 फरवरी 2001 को दिए आदेश को असंवेधानिक मानते हुए रद्द कर दिया हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्यवाही केवल समय पर ही नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए.
तीन माह में परिजनों को मिले लाभ
मामले में याचिकाकर्ता कि पत्नी और बच्चों कि ओर से अधिवक्ता गौरव शर्मा ने पैरवी की.
अधिवक्ता गौरव शर्मा के अनुसार मुरारीलाल गुप्ता पंचायती विभाग में यूडीसी के पद से सेवानिवृत हुए थे. उनके खिलाफ दायर चार्जशीट के चलते सेवानिवृति के बाद भी उनके लाभ परिलाभ नहीं दिए गए थे.
राजस्थान हाईकोर्ट ने अब अपने फैसले में आदेश आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के कानूनी उत्तराधिकारियों को सभी परिणामी लाभ – जिसमें आर्थिक बकाया शामिल हैं, तीन माह के भीतर जारी किए जाएं.