जिसके पास अपना गांव है, उसके पास पूरा देश है।
संपादक की ओर से संदेश
(kantaliya.com)
“मेरा गांव, मेरा देश”—ये शब्द केवल एक पंक्ति नहीं हैं, ये मेरी पूरी जीवन-यात्रा का सार हैं। ये उस मिट्टी की खुशबू हैं, जो चाहे आप कितनी ही ऊँचाइयों तक क्यों न पहुंच जाएं, आपको बार-बार अपनी ओर खींच लेती है। जीवन में कई सपने पूरे होते हैं—पहली विदेश यात्रा, बड़े मंच, बड़ी पहचान और देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान में दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में काम करने का अवसर। ये उपलब्धियां खुशी देती हैं, गर्व भी देती हैं। लेकिन इनके बीच एक सवाल हमेशा भीतर खड़ा रहता है—आपने अपनी मिट्टी के लिए, अपने गांव के लिए, अपने देश के लिए क्या किया?
यह सवाल बहुत शांत होता है, लेकिन इसकी गूंज बहुत गहरी होती है।
क्योंकि उपलब्धियां आपकी हो सकती हैं, लेकिन गांव आपकी पहचान होता है।
गांव को अपने भीतर लेकर शहरों में जीना आसान नहीं होता। हर कदम पर एक ऐसा शहरी वातावरण मिलता है, जो अनकहे शब्दों में यह जता देता है कि आप बराबरी नहीं कर सकते। आपकी बोली, आपका पहनावा, आपकी सादगी—सब कुछ अलग माना जाता है। लेकिन जिस दिन गांव का इंसान यह समझ लेता है कि उसे किसी से बराबरी करने की जरूरत ही नहीं है, उसी दिन उसके भीतर की बेचैनी समाप्त हो जाती है। उसी दिन वह जान लेता है कि उसकी जड़ें बहुत गहरी हैं और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
मेरे लिए मेरा गांव ही मेरा देश है।
मेरा गांव ही मेरा सुकून है।
मेरा गांव ही मेरी पहचान है।
kantaliya.com उसी पहचान को शब्द देने का प्रयास है। यह केवल एक वेबसाइट नहीं है, बल्कि अपनी मिट्टी के प्रति एक जवाब है—उस सवाल का जवाब, जो सालों से भीतर खड़ा था। यह मंच उस गांव की कहानी कहने के लिए है, जिसकी उत्पत्ति ही अहिंसा के आद्य प्रवर्तक की पहचान से जुड़ी है। यह वह धरती है, जहां संतों ने विचार दिए, वीरों ने साहस सिखाया और साधारण लोगों ने असाधारण जीवन जीकर दुनिया को नई राह दिखाई।
यह वही गांव है जहां आचार्य श्री भीक्षू ने जन्म लिया।
यह वही भूमि है जहां श्रीनाथजी मंदिर की आस्था बसती है, कोटड़ा माता मंदिर की शक्ति विराजमान है, गेबनशाह वली बाबा की दरगाह में प्रेम और भाईचारे की खुशबू फैलती है और आईमाता का विश्व-प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
यह गांव सिखाता है कि आस्था के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंज़िल एक ही होती है—मानवता।
कण्टालिया किसी एक धर्म, एक वर्ग या एक पहचान तक सीमित नहीं है। यह गांव अपने भीतर पूरा भारत समेटे हुए है। यहां पर मंदिर की घंटियां और दरगाह की अज़ान एक-दूसरे की पूरक हैं। यहां पर इतिहास और वर्तमान साथ-साथ चलते हैं। यही वजह है कि कण्टालिया भारत देश का आईना है—सादा, सच्चा और समावेशी।
आज के समय में गांव अक्सर हाशिये पर खड़े कर दिए जाते हैं। उनकी कहानियां, उनका संघर्ष, उनकी उपलब्धियां बड़े मंचों तक नहीं पहुंच पातीं। kantaliya.com उसी खामोशी को तोड़ने का एक छोटा-सा प्रयास है। यह मंच गांव की आवाज़ है—उन लोगों की आवाज़, जिन्होंने कभी मंच नहीं मांगा, लेकिन हमेशा समाज को संभाला।
हमारा उद्देश्य केवल खबरें देना नहीं है। हमारा उद्देश्य अपने गांव की आत्मा को दुनिया के सामने रखना है—उसकी संस्कृति, उसकी परंपराएं, उसके लोग, उसकी चुनौतियां और उसके सपने। यह वेबसाइट उन युवाओं के लिए है, जो गांव से निकलकर शहरों में हैं और कहीं न कहीं अपनी मिट्टी को याद करते हैं। यह मंच उन बुजुर्गों के लिए है, जिन्होंने इस गांव को अपने पसीने से सींचा है। और यह उन बच्चों के लिए है, जो आने वाले कल का कण्टालिया और भारत हैं।
कण्टालिया को आप तक पहुंचाने का यह प्रयास तभी सार्थक होगा, जब आप इससे जुड़ेंगे। आपकी यादें, आपकी कहानियां, आपके विचार और आपका विश्वास ही kantaliya.com की असली पूंजी हैं।
क्योंकि अंत में सच यही है—
जिसके पास अपना गांव है, उसके पास पूरा देश है।
— संपादक
kantaliya.com