KPS निशुल्क शिक्षण अभियान

KPS निशुल्क शिक्षण अभियान: एक सपने से जनआंदोलन तक

KPS निशुल्क शिक्षण अभियान केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि उस सामाजिक सच्चाई का उत्तर है, जिसमें प्रतिभा होते हुए भी संसाधनों के अभाव में हजारों बच्चे अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इस अभियान की नींव श्री निज़ाम कण्टालिया के जीवन अनुभवों, संघर्षों और उस संकल्प में निहित है, जिसने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना।

श्री निज़ाम कण्टालिया ने पाली स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से 12वीं (मानविकी) की परीक्षा में पूरे राजस्थान प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि किसी भी छात्र के लिए उज्ज्वल भविष्य का द्वार खोल सकती थी, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते वे आगे की नियमित शिक्षा जारी नहीं रख सके। यह अनुभव उनके जीवन का एक ऐसा मोड़ बना, जिसने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि यदि एक टॉपर छात्र इस स्थिति का सामना कर सकता है, तो सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों होनहार बच्चों की स्थिति कितनी कठिन होगी।

इसी प्रश्न के उत्तर की तलाश में उन्होंने नवोदय विद्यालय के अनेक होनहार और टॉपर छात्रों से संवाद किया। इस संवाद से सामने आई एक बेहद चिंताजनक सच्चाई—लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिभाशाली छात्र केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक कमजोरी और सही मार्गदर्शन के अभाव में अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। यहीं से शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ठोस और स्थायी करने का विचार जन्मा।

इस उद्देश्य को लेकर वर्ष 2004 में उन्होंने पाली जिले की नवोदय एल्यूमनी के गठन में अहम भूमिका निभाई, ताकि पूर्व छात्रों के सहयोग से वर्तमान छात्रों को मार्गदर्शन और सहायता मिल सके। हालांकि, समय के साथ एल्यूमनी पर कुछ व्यावसायिक तत्वों का प्रभाव बढ़ने लगा, जिससे मूल उद्देश्य प्रभावित होने लगा। इस स्थिति को देखते हुए, शिक्षा और समाजसेवा को पूरी तरह निष्कलंक और उद्देश्यपरक बनाए रखने के लिए वर्ष 2008 में उन्होंने श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान की स्थापना की।

संस्थान की स्थापना के बाद वर्ष 2008 से 2013 तक क्षेत्र में निरंतर सामाजिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना था। इसी क्रम में वर्ष 2009 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और बच्चों को प्रेरित करने के लिए पहली बार आचार्य श्री भीक्षु अवार्ड की शुरुआत की गई। यह अवार्ड वर्ष 2010, 2011 और 2013 तक निरंतर प्रदान किया गया, जिससे समाज में शिक्षा को लेकर सम्मान और प्रेरणा का वातावरण बना।

वर्ष 2013 से 2023 तक श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने कार्यों को निरंतर जारी रखा। इस दौरान यह स्पष्ट होता गया कि केवल सम्मान और कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर नियमित और संगठित निशुल्क शिक्षण व्यवस्था की आवश्यकता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों को निरंतर सहारा दे सके।

इसी सोच के साथ वर्ष 2024 में श्री निज़ाम कण्टालिया की ओर से एक संगठित निशुल्क शिक्षण अभियान की योजना पर कार्य शुरू हुआ। इसके लिए सबसे पहले एक समर्पित संस्थान परिसर का निर्माण कराया गया, ताकि बच्चों को एक सुरक्षित, अनुशासित और प्रेरक शैक्षणिक वातावरण मिल सके। लंबी तैयारी और सीमित संसाधनों के बावजूद, अंततः 1 जुलाई 2015 को केवल एक छात्र के साथ इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। यह एक छोटा कदम था, लेकिन इसके पीछे सोच और संकल्प अत्यंत व्यापक था।

आज KPS निशुल्क शिक्षण अभियान एक मजबूत और विश्वसनीय शैक्षणिक पहल के रूप में स्थापित हो चुका है। वर्तमान में इस अभियान के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के पांचवीं, आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षण, विषयवार मार्गदर्शन और विशेष कक्षाओं की सुविधा प्रदान की जा रही है। इन कक्षाओं का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और आगे बढ़ने की स्पष्ट दिशा विकसित करना है।

भविष्य को ध्यान में रखते हुए, अभियान के तहत शीघ्र ही सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे स्कूल से जुड़ें और शिक्षा की मुख्यधारा में आएं। इसके साथ ही आगामी वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कंप्यूटर एवं डिजिटल साक्षरता की निशुल्क कक्षाओं के आयोजन का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्र बदलते समय के साथ कदम से कदम मिला सकें।

श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान की ओर से प्रतिवर्ष 30 जून और 31 जनवरी को दो विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं। इन समारोहों में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ ईमानदारी और समर्पण से कार्य करने वाले सरकारी सेवकों को भी सम्मानित किया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक आदर्श स्थापित करना और बच्चों को प्रेरणा देना है।

KPS निशुल्क शिक्षण अभियान आज एक व्यक्ति के सपने से आगे बढ़कर सामूहिक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। यह अभियान उन हजारों बच्चों की उम्मीद है, जिनके सपने केवल संसाधनों की कमी के कारण अधूरे रह जाते हैं। शिक्षा के माध्यम से समान अवसर और उज्ज्वल भविष्य का यह प्रयास आने वाले समय में समाज के लिए एक स्थायी परिवर्तन की नींव रखेगा।

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