देश में मारवाड़ के रूप में पहचान रखने वाले राजस्थान के पाली जिले का मारवाड़ जंक्शन का मुख्य केन्द्र कण्टालिया गांव हैं.
कंटालिया गाँव अपनी आबादी, सामाजिक सक्रियता और भौगोलिक स्थिति के कारण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
इस गांव का इतिहास बेहद ही शानदार और धार्मिक हैं.
मारवाड़ जंक्शन तहसील के अंतर्गत आने वाला कंटालिया गाँव क्षेत्र का एक प्रमुख और बड़ा गाँव है। 2011 की जनगणना के अनुसार, कंटालिया की कुल जनसंख्या 8,549 दर्ज की गई थी।
कांटालिया गाँव पाली ज़िला मुख्यालय से लगभग 59 किलोमीटर पूर्व और राज्य की राजधानी जयपुर से लगभग 274 किलोमीटर दूर स्थित है। यह गाँव जोधपुर संभाग का हिस्सा है और क्षेत्र में अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान रखता है।
देश और दुनिया का पथ प्रदर्शन करने वाले तेरापंथ सम्प्रदाय के संस्थापक और जैन समाज के महान सुधारक आचार्य श्री भीक्षू की जन्म स्थली हैं.
आचार्य भिक्षु, जिन्हें भिक्षणजी के नाम से भी जाना जाता है, ने जैन धर्म में सुधार आंदोलन की शुरुआत की थी। उन्होंने तेरापंथ सम्प्रदाय की स्थापना की और “एक आचार्य, एक सिद्धांत, एक विचार” की नीति को आगे बढ़ाया। उनकी शिक्षाएँ आज भी लाखों अनुयायियों के जीवन का आधार हैं।
कण्टालिया गांव आज दुनियाभर में जैन समाज के लिए पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। यहाँ हर वर्ष जैन अनुयायी आचार्य भिक्षु की स्मृति में धार्मिक आयोजन करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं।
आचार्य भिक्षु का जन्म राजस्थान के कांटालिया गाँव में हुआ. वे बीसा ओसवाल व्यापारी वर्ग से थे और 1751 में दीक्षा लेकर संन्यासी जीवन में प्रविष्ट हुए। उन्होंने समाज में व्याप्त शोषण, असमानता और अंधविश्वास के विरोध में आवाज उठाई और धर्म को जनसाधारण के जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।
आचार्य भिक्षु (1726–1803) जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ सम्प्रदाय के संस्थापक और प्रथम आचार्य थे। वे भगवान महावीर के अनन्य भक्त और जैन दर्शन के गहरे ज्ञाता थे.
कण्टालिया अपने ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के बाद अब अपने विकास को लेकर आगे बढ रहा हैं.
श्री नंदीनाथ जी क मंदिर इस गांव की आस्था का प्रमुख मंदिर हैं जो कि इस गांव के केन्द्र में स्थित हैं लोगो की आस्था हैं कि इस मंदिर पर पर आकर कोई झूठ नहीं बोल सकता और अगर वो ऐसा करता हैं तो अगले कुछ माह में ही उसे उसका भुगतान करना पड़ता हैं.
राजसमंद के श्रीनाथजी मंदिर के बाद कण्टालिया गांव में ही श्रीनाथजी का मंदिर माना जाता हैं.
कण्टालिया गांव के धार्मिक स्थलो में ऐतिहासिक रूप से गेबन शाह बाबा की दरगाह हैं, इस दरगाह के प्रति सभी समुदाय के लोग अपनी आस्था रखते हैं.
देश में मारवाड़ी समाज और व्यापारी वर्ग के रूप में अपनी पहचान बना चुका सीरवी समाज के अराध्या श्री आईमाता की बढेर भी इस गांव में मुख्य धार्मिक स्थल हैं.
**कण्टालिया: आचार्य भिक्षु की जन्मभूमि, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक समरसता से सराबोर मारवाड़ का गौरव गाँव**
पाली, 16 अक्टूबर
देश में “**मारवाड़**” के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान की धरती अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के लिए जानी जाती है। इसी भूमि के **पाली ज़िले** में स्थित **मारवाड़ जंक्शन तहसील का प्रमुख केंद्र कण्टालिया गाँव** अपनी पहचान, इतिहास और आस्था के कारण आज पूरे प्रदेश में चर्चित है।
**कण्टालिया गाँव** अपनी **जनसंख्या, सामाजिक सक्रियता और भौगोलिक स्थिति** के कारण क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण गाँव माना जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की कुल जनसंख्या **8,549** थी। यह गाँव पाली ज़िला मुख्यालय से **लगभग 59 किलोमीटर पूर्व** तथा राजस्थान की राजधानी **जयपुर से लगभग 274 किलोमीटर दूर** स्थित है। **जोधपुर संभाग** के अंतर्गत आने वाला यह गाँव धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से विशेष महत्व रखता है।
यह वही पवित्र भूमि है जहाँ **जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ सम्प्रदाय के संस्थापक और प्रथम आचार्य, आचार्य श्री भिक्षु (1726–1803)** का जन्म हुआ था। आचार्य भिक्षु, जिन्हें **भिक्षणजी** के नाम से भी जाना जाता है, ने जैन धर्म में **सुधार आंदोलन** की शुरुआत की और “**एक आचार्य, एक सिद्धांत, एक विचार**” की नीति दी, जो आज भी तेरापंथ सम्प्रदाय की आधारशिला है।
वे भगवान **महावीर के अनन्य भक्त** और जैन दर्शन के गहरे ज्ञाता थे। 1751 में दीक्षा लेकर उन्होंने संन्यासी जीवन आरंभ किया और समाज में व्याप्त **शोषण, असमानता और अंधविश्वास** के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने धर्म को जनसाधारण के जीवन से जोड़ने का प्रयास किया और सच्चे आचरण पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी।
आज कण्टालिया गाँव जैन समाज के लिए **पवित्र तीर्थ स्थल** के रूप में प्रसिद्ध है। हर वर्ष देश और विदेश से असंख्य जैन अनुयायी यहाँ पहुँचकर **आचार्य भिक्षु की जन्मस्थली पर दर्शन करते हैं** और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं।
### **कण्टालिया की आस्था और धार्मिक एकता**
कण्टालिया केवल जैन समाज के लिए ही नहीं, बल्कि **सभी समुदायों की धार्मिक आस्था का संगम स्थल** है। गाँव के केंद्र में स्थित **श्री नंदीनाथ जी का मंदिर** यहाँ की आस्था का प्रमुख प्रतीक है। मान्यता है कि इस मंदिर के समक्ष **कोई झूठ नहीं बोल सकता**। जो व्यक्ति यहाँ असत्य बोलता है, उसे कुछ ही महीनों में उसका परिणाम भुगतना पड़ता है। इसी विश्वास ने इस मंदिर को “**सत्य का मंदिर**” बना दिया है।
इसके अलावा, कण्टालिया में **श्रीनाथजी मंदिर** भी अत्यंत प्रसिद्ध है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, **राजसमंद के प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर** के बाद कण्टालिया का यह मंदिर ही दूसरा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
गाँव में स्थित **गेबन शाह बाबा की दरगाह** भी सभी समुदायों की आस्था का केंद्र है। यहाँ हर धर्म और जाति के लोग श्रद्धा से हाजिरी लगाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। यह दरगाह **सद्भाव और एकता की मिसाल** मानी जाती है।
कण्टालिया में **सीरवी समाज के आराध्य श्री आईमाता जी की बढेर** भी प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ नवरात्रि और अन्य पर्वों पर विशेष आयोजन होते हैं, जहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
### **विकास की राह पर कण्टालिया**
धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के बाद अब **कण्टालिया विकास के मार्ग पर तेजी से अग्रसर** है। यहाँ शिक्षा, सड़कों और सामाजिक संरचनाओं में निरंतर सुधार हो रहा है। स्थानीय युवाओं द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से गाँव में नई ऊर्जा और एकता का संचार हो रहा है।
आज कण्टालिया न केवल **आचार्य भिक्षु की जन्मभूमि** के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह **राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक** भी बन चुका है — जहाँ धर्म, सत्य, आस्था और विकास एक साथ पनपते हैं।
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