जोधपुर, 9 सितंबर
जोधपुर मेहरानगढ़ दुखांतिका के 17 साल बाद भी जस्टिस जसराज चोपड़ा जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में नहीं रखने के मामले में दायर याचिका को देश के किसी दूसरे हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए अनुरोध किया गया हैं.
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दायर करते हुए इस मामले की सुनवाई देश के किसी अन्य हाईकोर्ट से कराने का अनुरोध किया हैं.
2008 की दुखांतिका
वर्ष 2008 में नवरात्रा के दौरान मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित चामुंडा माता मंदिर में मची भगदड़ में करीब 224 व्यक्तियों की मौत हो गई थी तथा 425 लोग घायल हो गए थे.
इस घटना की जांच के लिए सरकार ने सेवानिवृत जस्टिस जसराज चोपड़ा की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था.
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2011 में अपनी सिफारिशों के साथ सरकार को पेश कर दी थी.
रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं…
सरकार द्वारा नियम के अनुसार इस रिपोर्ट को विधानसभा के सदन में चर्चा कर निर्णय हेतु रखा जाना था लेकिन सरकार ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने तथा हाउस में नहीं रखने का निर्णय लिया.
जिसके बाद वर्ष 2017 में मानाराम नामक स्थानीय निवासी तथा वर्ष 2024 में वरिष्ठ समाज सेवक ईश्वर प्रसाद खंडेलवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने के आदेश देने का अनुरोध किया.
करीब 8 साल बाद भी इस मामले में राज्य सरकार द्वारा टालमटाले का रवैया अपनाया गया, जिसके चलते अब याचिकाकर्ता ईश्वर प्रसाद खंडेलवाल ने सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरण याचिका दायर कर उनकी याचिका को सर्वोच्च न्यायालय या भारत के किसी अन्य हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया हैं.




