श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान: विचार से संगठन और संगठन से समाज परिवर्तन की यात्रा
मारवाड़ आंचल की पहचान केवल अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र हमेशा से सामाजिक चेतना, सामूहिक प्रयास और आत्मनिर्भरता के उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है। इसी आंचल में स्थित कण्टालिया गांव, जो देशभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, तथा उसके आसपास के 24 गांवों के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 2008 में पहली बार श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान का विचार सामने आया। यह केवल एक संस्था की स्थापना नहीं थी, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक विकास के लिए एक साझा संकल्प था।
संस्थान की परिकल्पना उस समय की गई, जब यह स्पष्ट हो चुका था कि सरकारी योजनाएं और संसाधन तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब स्थानीय स्तर पर संगठित प्रयास और जागरूकता हो। इसी सोच के साथ श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान को एक ऐसे मंच के रूप में आकार दिया गया, जो गांवों की वास्तविक ज़रूरतों को समझे और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़े। संस्थान के गठन के साथ ही तत्कालीन सांसद श्री बद्रीराम जाखड़ ने इसके संरक्षक की भूमिका निभाई। उनके संरक्षण और मार्गदर्शन में संस्थान के कई कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें वे स्वयं उपस्थित रहे। उनके सहयोग से संस्थान को प्रारंभिक दौर में सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर पहचान व विश्वास प्राप्त हुआ।
संस्थान के शुरुआती चरण में इसके कार्यक्षेत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया। प्राथमिक लक्ष्य था—गांवों के सरकारी संस्थानों को सशक्त बनाना, सामाजिक चेतना का विकास करना और शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना। इसके अंतर्गत यह समझ विकसित की गई कि शिक्षा केवल स्कूलों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह सोच, व्यवहार और समाज की दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। इसी कारण संस्थान ने शिक्षा को अपने कार्यों के केंद्र में रखा, साथ ही सामाजिक जागरूकता, आपसी सहयोग और सामुदायिक भागीदारी को भी समान महत्व दिया।
इस विचार को ज़मीनी रूप देने में निज़ाम कण्टालिया की सोच और नेतृत्व निर्णायक रहा। उनके साथ गांव के ही कई समर्पित और जागरूक लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया। इनमें राणाराम बंजारा, मंजूर अली, अनिल बारूपाल, महावीर उदित और दीपक व्यास का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इन सभी ने बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के, क्षेत्र के सामूहिक हित को प्राथमिकता देते हुए संस्थान को मजबूत आधार प्रदान किया। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद, इन सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से संस्थान ने क्षेत्र में अपनी एक सकारात्मक पहचान बनानी शुरू की।
समय के साथ, जैसे-जैसे संस्थान का दायरा और गतिविधियां बढ़ीं, वैसे-वैसे इसमें कई परिवर्तन और पुनर्संरचना भी हुई। किसी भी सामाजिक संगठन की तरह, यहां भी परिस्थितियों और प्राथमिकताओं में बदलाव आए। व्यावसायिक और व्यक्तिगत कारणों से आगे चलकर श्री राणाराम बंजारा सहित कुछ सदस्य संस्थान से अलग हुए। हालांकि, इन बदलावों को संस्थान ने किसी बाधा के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया। संस्थान की मूल सोच—क्षेत्र का विकास और समाज का सशक्तिकरण—इन परिवर्तनों के बावजूद निरंतर बनी रही।
वर्तमान समय में श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती रईसा बानो के नेतृत्व में संस्था ने शिक्षा को फिर से अपने केंद्र में रखते हुए कई कार्यक्रमों की योजना और आयोजन का प्रयास शुरू किया है। उनके नेतृत्व में यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि यदि बच्चों और युवाओं को सही दिशा, अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो क्षेत्र का भविष्य स्वतः ही उज्ज्वल हो सकता है। वर्तमान नेतृत्व का फोकस विशेष रूप से शिक्षा, सामाजिक समरसता और दीर्घकालीन विकास की योजनाओं पर है।
वर्तमान नेतृत्व के तहत संस्थान का उद्देश्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अंतर्गत महिला समूहों (Self Help Groups) की स्थापना कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने, आजीविका से जोड़ने, प्रशिक्षण देने और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्य करना भी संस्थान की प्रमुख योजनाओं में शामिल है।
शिक्षा के साथ-साथ संस्थान ने महिला सशक्तिकरण को भी अपनी प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया है। यह मान्यता है कि जब तक महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होंगी, तब तक किसी भी क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से संस्थान द्वारा महिला समूहों (Self Help Groups) की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन महिला समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें आजीविका से जोड़ने, कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिला समूहों के विकास के लिए नियमित बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाने की योजना है, ताकि महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हों, बल्कि सामाजिक नेतृत्व में भी अपनी भूमिका निभा सकें।
संस्थान की गतिविधियां केवल शिक्षा और महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक चेतना, आपसी भाईचारे और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। संस्थान का मानना है कि सामाजिक कुरीतियों, रूढ़ियों और असमानताओं को दूर किए बिना विकास अधूरा रहता है। इसलिए समय-समय पर सामाजिक संवाद, जागरूकता कार्यक्रम और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
आज श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान केवल एक संस्था नहीं, बल्कि 24 गांवों की साझा आशा और प्रयासों का प्रतीक बन चुका है। यह संस्थान इस बात का उदाहरण है कि जब स्थानीय लोग अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी स्वयं उठाते हैं, तो सीमित साधनों में भी बड़े बदलाव संभव होते हैं। आने वाले समय में संस्थान का लक्ष्य शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, युवाओं के कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता को और अधिक मजबूत करना है, ताकि कण्टालिया और आसपास के गांव विकास की मुख्यधारा में सशक्त रूप से आगे बढ़ सकें।
श्री कण्टालिया क्षेत्र विकास संस्थान की यह यात्रा यह संदेश देती है कि विचार जब संगठन का रूप लेता है और संगठन समाज से जुड़ता है, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।




